राज्यसभा में मजबूत होती दिख रही एनडीए की स्थिति, भाजपा की बढ़ती संख्या ने बदला सियासी गणित

राज्यसभा में मजबूत होती दिख रही एनडीए की स्थिति, भाजपा की बढ़ती संख्या ने बदला सियासी गणित

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NDA's position appears to be strengthening in the Rajya Sabha

नई दिल्ली। NDA's position appears to be strengthening in the Rajya Sabha, विरोधी दलों में टूट और बिखराव के साथ ही भाजपा की ताकत सदन में बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ समय में ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम चले हैं, जिन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की संसद के उच्च सदन में भी ताकत को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया है।

आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट के बाद उसके सात सांसद भाजपा में शामिल हुए और अब तृणमूल कांग्रेस से त्याग पत्र देकर भाजपा में शामिल हुए सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक को भी पार्टी ने पश्चिम बंगाल के राज्य सभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है। उनकी जीत तय है, जिसके बाद ऐतिहासिक रूप से राजग सदन में दो तिहाई बहुमत की ओर तेजी से बढ़ता दिख रहा है।

राजग राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब

तृणमूल कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने पिछले दिनों पार्टी की सदस्यता सहित सदन की सदस्यता से भी त्याग-पत्र दिया।

उसके बाद ही यह तीन सीटें रिक्त हो गईं। जैसी कि अटकलें लगाई जा रही थीं, तीनों ने ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली और तुरंत ही भाजपा ने उन्हें राज्य सभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार भी बना दिया।

हाल ही में पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त करने वाले भगवा दल के तीनों प्रत्याशियों का जीतना तय है। चुनाव 24 जुलाई को होना है।

इसके बाद राज्य सभा में सत्ताधारी दल का गणित और मजबूत होने जा रहा है। दरअसल, 245 सदस्यों वाले उच्च सदन में अभी भाजपा के 114 सदस्य हैं जिसमें बंगाल के इन तीन सदस्यों के जुड़ने के बाद भाजपा 117 हो जाएगी।

क्या कहते हैं आंकड़ें?

अब यदि राजग की बात करें तो सहयागी दलों के 26 सदस्य हैं। इनमें यदि हाल ही में झारखंड से जीतकर आए तीन भाजपा समर्थित निर्दलीय सदस्यों को जोड़ लें तो राजग का कुनबा 146 सदस्यों का हो जाता है।

चूंकि नामित सदस्य भी अधिकृत रूप से किसी खेमे में न शामिल हों, लेकिन परोक्ष रूप से इन्हें सत्ता पक्ष का समर्थक ही माना जाता है।

ऐसे में यदि जब सदन में नंबर गेम की जरूरत होगी तो सात नामित सदस्यों को इनमें शामिल करते ही संख्या 153 हो जाएगी। वहीं, दो तिहाई बहुमत के लिए 164 का आंकड़ा चाहिए, जिससे राजग सिर्फ 13 अंकों से दूर रह जाएगा।

AAP और TMC की बड़ी भूमिका

इस बीच चर्चा है कि टीएमसी के शेष रह गए दस राज्य सभा सदस्यों में से तीन या चार के भी तृणमूल से छिटकने की संभावना है। ऐसा हुआ तो भाजपा को दो तिहाई बहुमत पाने के लिए लगभग सात-आठ सांसदों की ही आवश्यकता होगी।

उल्लेखनीय है कि एनडीए काे इस आंकड़े तक पहुंचाने में आम अादमी पार्टी की टूट की बड़ी भूमिका है। अप्रैल में ही इस दल के सात सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी ने पार्टी से त्याग-पत्र देकर भाजपा सांसद के रूप में शपथ ली थी।